चमोली (उत्तराखंड): देवभूमि के जंगलों से एक विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। बदरीनाथ वन प्रभाग की मध्य पिंडर रेंज इस वक्त आग के शोलों में घिरी हुई है। चेपड़ों और सौगांव से शुरू हुई यह चिंगारी अब एक विकराल ‘दावानल’ का रूप ले चुकी है, जो खाड़ीबगड़ और गोठिंडा जैसे विशाल क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले चुकी है।
📍 ग्राउंंड रिपोर्ट: संकट में गांव और गौशालाएं
आग की लपटें इतनी ऊंची हैं कि दूर-दूर से आसमान लाल नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता चेपड़ों गांव को लेकर है, जहां आग की लपटें सीधे गौशालाओं की ओर बढ़ रही हैं।
- ग्रामीणों में खौफ: जूनिधार गांव की सीमाओं तक आग पहुँचने से लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
- चुनौतीपूर्ण भूगोल: चीड़ के सूखे पत्तों और ज्वलनशील ‘लीसे’ (Resin) ने आग में घी का काम किया है। खड़ी चट्टानों के कारण वन विभाग की टीमें चाहकर भी उन दुर्गम इलाकों तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
🚦 थराली-देवाल हाईवे पर ‘पत्थरों की बारिश’
जंगल की यह आग अब सिर्फ पेड़ों तक सीमित नहीं है, इसने लाइफलाइन माने जाने वाले थराली-देवाल स्टेट हाईवे को भी अपनी जद में ले लिया है।
चेतावनी: पहाड़ियों से जलते हुए पेड़ और बड़े-बड़े पत्थर टूटकर सड़क पर गिर रहे हैं। वन विभाग ने यात्रियों को इस मार्ग पर अत्यधिक सावधानी बरतने या आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
😷 सेहत और पर्यावरण पर प्रहार
- सांसों पर पहरा: पूरे इलाके में धुएं की घनी चादर बिछ गई है। बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायतें आ रही हैं।
- वन्यजीवों का पलायन: इस भीषण आग में न केवल बेशकीमती वन संपदा राख हो रही है, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों के आशियाने भी उजड़ गए हैं।
🔍 क्या यह मानवीय साजिश है?
वन विभाग की टीमें रात-दिन आग बुझाने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन अंधेरा और भौगोलिक स्थिति बाधा बनी हुई है। विभाग अब उन ‘शरारती तत्वों’ की तलाश कर रहा है, जिन्होंने संभवतः अपनी निजी स्वार्थ या लापरवाही से इस तबाही को अंजाम दिया है।
राय: प्रकृति का यह नुकसान हम सबकी सामूहिक क्षति है। अगर आप उस क्षेत्र के आसपास हैं, तो सुरक्षित रहें और प्रशासन का सहयोग करें।