- 3 करोड़ रुपये की लागत से जीआईसी की खाली भूमि पर दुमंजिला भवन का निर्माण शुरू।
- श्रीनगर, कीर्तिनगर और चौरास क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं को मिलेगा सीधा लाभ।
- दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप व विशेष सुविधाओं से लैस होगी ई-लाइब्रेरी।
श्रीनगर। श्रीनगर गढ़वाल और आसपास के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को जल्द ही एक अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी की सौगात मिलने जा रही है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं स्थानीय विधायक डॉ. धन सिंह रावत के प्रयासों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क व ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के समीप राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) की खाली पड़ी भूमि पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से दुमंजिला ई-लाइब्रेरी का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो चुका है। श्रीनगर में इस तरह का आधुनिक लर्निंग सेंटर पहली बार तैयार किया जा रहा है।
ई-लाइब्रेरी में मिलेंगी ये प्रमुख सुविधाएं
- डिजिटल व ई-लर्निंग संसाधन: विभिन्न विषयों की अपडेटेड किताबों के साथ-साथ उच्च स्तरीय ई-लर्निंग सुविधाएं और ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल उपलब्ध रहेगा।
- दिव्यांग-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर: भवन को दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम बनाने हेतु प्रवेश द्वार पर रैंप और अन्य आवश्यक सुविधाएं विशेष रूप से तैयार की जा रही हैं।
- शिफ्ट सिस्टम व शांत वातावरण: हजारों छात्र-छात्राओं को शिफ्ट के अनुसार बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, शांत और व्यवस्थित माहौल मिलेगा।
- विस्तृत क्षेत्र को लाभ: इस केंद्र से श्रीनगर शहर के अलावा कीर्तिनगर और चौरास क्षेत्र के युवा भी उच्च शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष जोर
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निर्माणाधीन ई-लाइब्रेरी का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था (पेयजल निर्माण निगम) के अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण को उच्च गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
खंड शिक्षा अधिकारी अश्वनी रावत ने बताया कि श्रीनगर के साथ-साथ कोटद्वार में भी इसी तर्ज पर ई-लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे युवाओं को अब तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
“श्रीनगर में पहली बार आधुनिक सुविधाओं से युक्त ई-लाइब्रेरी तैयार हो रही है। यह युवाओं के लिए पढ़ाई का बेहतर, शांत और सुरक्षित केंद्र बनेगी। हमारा प्रयास है कि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आधुनिक संसाधन उपलब्ध हों, ताकि उन्हें तैयारी के लिए बाहर न जाना पड़े।”
— डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री (उत्तराखंड सरकार)