जौनसार-बावर। जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले आराध्य महासू देवता का देवनांयणी (जागड़ा पर्व) सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही क्षेत्र के तमाम महासू मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और ‘जय महासू देवता’ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे।

कचटा में चालदा महासू का हुआ शाही स्नान
कचटा स्थित चालदा महासू महाराज मंदिर में जागड़ा पर्व पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। शुभ मुहूर्त में मंदिर के पुजारी, देवमाली, वजीर और भंडारी ने गर्भगृह से देव चिन्हों को बाहर निकाला। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर गूंज के बीच देव चिन्हों का विधि-विधान से शाही स्नान कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए देव चिन्हों को मंदिर परिसर में विराजमान किया गया। पूजन व दर्शन के उपरांत देव चिन्हों को पुनः रीति-रिवाज के साथ गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया।
हिमाचल और उत्तरकाशी से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
चालदा महासू महाराज के दर्शन के लिए जौनसार-बावर के अलावा पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तरकाशी से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु कचटा पहुंचे और सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगीं। इस दौरान देव स्तुति और पारंपरिक ‘हारूल नृत्य’ की प्रस्तुति ने पर्व की रोनक बढ़ा दी।
हनोल, थैना समेत कई मंदिरों में रही जागड़ा की धूम
मूल महासू देवता मंदिर हनोल और प्रमुख मंदिर थैना सहित लखवाड़, बिसोई, लखस्यार, भंजरा, कोटी विशायल, गबेला, सलगा, बोहा, अस्टी, टिपऊ, मलऊ, दिलऊ, तारली, सैंज, उपरोली खाटूवा, टूंगरा, टगरी और कोटूवा आदि मंदिरों में भी जागड़ा पर्व की धूम रही। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन कर प्रसाद वितरित किया गया।