देहरादून। प्रदेश प्रधान संगठन के आह्वान पर गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया। परेड ग्राउंड से नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रधानों को पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्कामुक्की हुई।
पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज ग्राम प्रधानों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ गए। इस दौरान मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
प्रदेश प्रधान संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश माहरा ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों को लेकर सरकार से लगातार आग्रह किया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मनरेगा में श्रमिकों को महंगाई के अनुपात में मजदूरी नहीं मिलने और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में नेटवर्क संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया।

संगठन ने ग्राम प्रधानों के लिए 20 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग की है। इसके अलावा जिला योजना की बैठकों में पंचायत प्रतिनिधियों को नामित करने, प्रधान निधि का गठन, 10 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने और पंचायत राज विभाग के 29 विषय पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग रखी गई है।
प्रधान संगठन का कहना है कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सकती है। संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 10 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
- ग्राम प्रधानों को 20 हजार रुपये मासिक मानदेय
- प्रधान निधि का गठन
- जिला योजना की बैठकों में पंचायत प्रतिनिधियों को नामित करना
- 10 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाना
- पंचायत राज विभाग के 29 विषय पंचायतों को हस्तांतरित करना
- मनरेगा मजदूरी में महंगाई के अनुरूप बढ़ोतरी
- ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में नेटवर्क संबंधी समस्याओं का समाधान