पैठाणी (पौड़ी गढ़वाल), 16 जनवरी 2026
देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक पैठाणी में आज भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। स्योलीगाड़ और नयार नदियों के पवित्र संगम पर स्थित प्राचीन राहु मंदिर (इंद्रेश्वर महादेव) परिसर के सौंदर्यकरण कार्य का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित भूमि पूजन और विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिरकत की।
धूमधाम से हुआ भूमि पूजन
आज शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों की नींव रखी गई। स्थानीय निवासियों और मंदिर समिति के सदस्यों ने इस कार्य को मंदिर के कायाकल्प की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। भूमि पूजन के पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया, जिससे पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।
उत्तर भारत का एकमात्र अनोखा मंदिर
पैठाणी का यह मंदिर अपनी बनावट और धार्मिक मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं:
- अनोखा संगम: यह उत्तर भारत का संभवतः एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान शिव के साथ राहु की पूजा की जाती है।
- प्राचीन इतिहास: नौवीं सदी में बने इस मंदिर की वास्तुकला कत्यूरी शैली की याद दिलाती है। इसे इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
- ग्रह दोष से मुक्ति: यह मंदिर विशेष रूप से ‘राहु दोष’ और अन्य ग्रह बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। दूर-दराज से लोग यहाँ अपनी कुंडली के दोषों के निवारण के लिए आते हैं।
- अनोखी परंपरा: यहाँ भक्त राहु देव को मूंग की खिचड़ी और महादेव को बेल पत्र अर्पित करते हैं।
पर्यटन और आस्था को मिलेगा बढ़ावा
स्योलीगाड़ और नयार नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। सौंदर्यकरण परियोजना के तहत मंदिर परिसर में यात्रियों की सुविधा, बैठने के स्थान और घाटों के सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाले तीर्थयात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर के दर्शन मात्र से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। आज के इस आयोजन ने क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।