पौड़ी। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जनपद में बालिकाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का एक भव्य उत्सव देखा गया। इस विशेष कार्यक्रम में जहाँ बेटियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लिया गया, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और बच्चों के बीच के आत्मीय संवाद ने माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया।
“घौर कु पछ्यांण, नौनी कु नौ” की गूँज
जिलाधिकारी के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत एक अनूठी पहल की गई। इस दौरान “घौर कु पछ्यांण, नौनी कु नौ” (घर की पहचान, बेटी के नाम) थीम के तहत बालिकाओं को उनके घरों के लिए उनके नाम की पट्टिकाएं (Name Plates) वितरित की गईं। यह कदम न केवल बेटियों को घर में स्वामित्व का अहसास कराता है, बल्कि समाज में उनके अस्तित्व को नई पहचान देने का प्रयास भी है।
उत्साह और आत्मविश्वास का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत बी.आर. मॉडर्न स्कूल की छात्रा अनुप्रिया खर्कवाल द्वारा दिलाई गई ‘बालिका दिवस शपथ’ से हुई। कार्यक्रम की मुख्य झलकियां इस प्रकार रहीं:
- सीधा संवाद: बालिकाओं ने जिलाधिकारी के साथ बेबाक चर्चा की और भविष्य के सपनों को साझा किया।
- ऊर्जावान भागीदारी: पूरे आयोजन के दौरान बेटियाँ आत्मविश्वास और उत्साह से लबरेज नजर आईं।
- जागरूकता: शपथ के माध्यम से बालिकाओं के अधिकारों और उनके संरक्षण का संदेश प्रसारित किया गया।
जब भावुक हुए लोग: जिलाधिकारी का आत्मीय दुलार
कार्यक्रम का सबसे हृदयस्पर्शी क्षण वह था, जब जिलाधिकारी ने नन्ही बालिका रुद्रांशी को गोद में लेकर स्नेहपूर्वक दुलार किया। यह दृश्य देख वहां मौजूद जनसमूह भावुक हो उठा। यह पल केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि बालिकाओं के प्रति संवेदनशीलता, सुरक्षा और सम्मान का एक सशक्त मानवीय संदेश था।
”बेटियां हमारे समाज का गौरव हैं। उन्हें पहचान और सुरक्षा देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।” – कार्यक्रम का मुख्य संदेश