देहरादून: उत्तराखंड में अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने स्कूल बसों और वैन के किराए के लिए नए दिशा-निर्देश और दरें जारी कर दी हैं। पिछले लंबे समय से निजी स्कूलों और ट्रांसपोर्टरों द्वारा मनमाना किराया वसूले जाने की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, नई दरों के लागू होने के बावजूद धरातल पर इसके क्रियान्वयन को लेकर ‘असमंजस’ की स्थिति बनी हुई है।
📋 नई किराया नीति की मुख्य बातें
परिवहन विभाग द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के तहत दूरी के आधार पर स्लैब बनाए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य परिवहन शुल्क में पारदर्शिता लाना है।
- तय सीमा: अब स्कूल संचालक या वैन चालक अपनी मर्जी से हर महीने किराया नहीं बढ़ा पाएंगे।
- दूरी का मानक: किराए का निर्धारण अब घर से स्कूल की सटीक दूरी के आधार पर होगा।
- सुरक्षा मानक: किराए के साथ-साथ वाहनों में सीसीटीवी, जीपीएस और फिटनेस सर्टिफिकेट की अनिवार्यता पर भी जोर दिया गया है।
🤨 ‘असमंजस’ की वजह: क्यों परेशान हैं अभिभावक और चालक?
भले ही कागजों पर किराया तय हो गया हो, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, कई बिंदुओं पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है:
- पहाड़ी बनाम मैदानी इलाके: उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए क्या मैदानी और पहाड़ी रूटों पर एक ही दर लागू होगी? इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है।
- पुराने कॉन्ट्रैक्ट: कई स्कूलों ने सत्र शुरू होने से पहले ही पुराने रेट पर अनुबंध कर लिए हैं, ऐसे में नए रेट लागू करना एक चुनौती है।
- निगरानी का अभाव: अभिभावकों का डर है कि प्रशासन आदेश तो निकाल देता है, लेकिन क्या स्कूलों के ‘सिंडिकेट’ पर कोई सख्ती होगी?