पौड़ी, 30 नवंबर 2025।
विकासखंड कल्जीखाल के बनेखखाल क्षेत्र स्थित ग्राम कुण्ड ने सहकारिता की शक्ति से ग्रामीण कृषि नवाचार का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। साधन सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने मिलकर ‘वीर माधो सिंह भण्डारी संयुक्त सहकारी खेती’ परियोजना शुरू की, जिसने 133.14 नाली बंजर और लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी भूमि को एक समृद्ध कृषि क्लस्टर में बदल दिया है।
परियोजना में कुल 22 किसान सक्रिय रूप से जुड़े हैं। यहां ग्लेडियोलस, गुलदाउदी और डेज़ी जैसे फूलों की व्यावसायिक खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। साथ ही पॉलीहाउस आधारित उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों का उत्पादन भी किसानों की आय का नया आधार बना है। इस मॉडल को और गति देने के लिए सहकारिता विभाग ने राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत ₹66,572.88 की धनराशि की मांग भेजी है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत इसका सामूहिक स्वरूप है। ग्रामीणों ने वीर माधो सिंह भण्डारी के नाम पर परियोजना को समर्पित करते हुए इसे आजीविका वृद्धि, कृषि क्लस्टर निर्माण, बंजर भूमि पुनर्जीवन और पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया है। इसके साथ ही यह क्षेत्र ग्रामीण पर्यटन की नई संभावनाओं को भी जन्म दे रहा है।
चयनित कृषि क्लस्टर के लिए बनेखखाल सहकारी समिति ने 20 किसानों से 14 वर्ष की अवधि के लिए भूमि अनुबंधित की है। परियोजना संचालन हेतु स्वीकृत ₹13,56,000 में से ₹11,50,000 का प्रभावी उपयोग किया जा चुका है। अक्टूबर माह से फूलों की कटिंग शुरू हुई, जिसमें गुलदाउदी के 1,866 बंच और ग्लेडियोलस के 2,743 बंच की बिक्री दिल्ली और देहरादून बाजारों में की गई। इससे समिति को अब तक ₹3,96,000 की आय प्राप्त हुई है, और कटिंग का कार्य लगातार जारी है।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जिले के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बताया। ग्राम कुण्ड की यह सफलता कहानी साबित करती है कि सामूहिक प्रयास, नारी शक्ति और सहकारिता की भावना से कोई भी बंजर भूमि आत्मनिर्भरता और समृद्धि का आधार बन सकती है। यह मॉडल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी एक सशक्त उदाहरण के रूप में अपनाया जा सकता है।