रुद्रप्रयाग। त्रियुगीनारायण वार्ड के जिला पंचायत सदस्य अमित मैखण्डी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर नागताल पर्यटन क्षेत्र के सौंदर्यीकरण एवं विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि नागताल को राज्य के उभरते पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कर प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाए।
अमित मैखण्डी ने अपने ज्ञापन में बताया कि त्रियुगीनारायण क्षेत्र का नागताल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, जिसे सही दिशा में विकसित करके क्षेत्र को नई पहचान दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि शीतकाल में नागताल की चारों ओर की पहाड़ियाँ बर्फ से ढक जाती हैं, जिससे यह स्थान एक प्रमुख विंटर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की क्षमता रखता है। यहाँ स्थित सुंदर बुग्याल, खुले घास के मैदान और बीच में स्थित आकर्षक झील पर्यटकों को अपनी ओर खींचने की भरपूर संभावनाएँ रखते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि हर वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर नागताल में भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से भी भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुँचते हैं। यदि इस क्षेत्र को पर्यटन दृष्टि से और अधिक विकसित किया जाए, तो वर्षभर यहाँ पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय लोगों के लिए नए रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे।
मैखण्डी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि नागताल क्षेत्र में मार्ग सुधार, पार्किंग क्षेत्र, ट्रेकिंग रूट, व्यू पॉइंट, प्रवेश व्यवस्था, पेयजल तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि इसे राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ग्रामीण एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और नागताल जैसे स्थानों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से लाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि यदि नागताल सौंदर्यीकरण प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होता है, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यटन का एक नया आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।
नागताल विकास से बदल सकती है पूरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नागताल को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ी बदलाव की संभावनाएँ हैं। नागताल क्षेत्र ग्रामीण इलाकों के बीच स्थित होने के कारण यहाँ पर्यटन गतिविधियाँ बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन, मार्गदर्शक (गाइड) सेवाएँ, भोजनालय और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि नागताल का प्राकृतिक वातावरण ऐसी विशेषता रखता है जिससे यह ट्रेकिंग, कैंपिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, बर्ड वॉचिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए एक आदर्श स्थान बन सकता है। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए आयाम खुलेंगे।
राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़ सकता है नागताल
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते उम्मीद है कि नागताल को उत्तराखंड सरकार की ग्रामीण पर्यटन प्रोत्साहन योजना और इको-टूरिज़्म मिशन के तहत विशेष पैकेज मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो यहाँ—
बेहतर सड़कें
पर्यटक सुविधाओं वाले विश्राम स्थल
सुरक्षित ट्रेकिंग रूट
व्यू प्वाइंट निर्माण
झील के आसपास सौंदर्यीकरण
पार्किंग और लाइटिंग व्यवस्था
जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा।
धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
नागताल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर लगने वाला वार्षिक मेला इसे आध्यात्मिक पर्यटन के रूप में भी बड़ी पहचान देता है। हजारों श्रद्धालु हर वर्ष यहाँ पहुँचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र का विकास होने पर धार्मिक पर्यटन में भी बड़ा इजाफा होगा।
“नागताल को राज्य का उभरता पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा” – स्थानीय जनप्रतिनिधि
अमित मैखण्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने विश्वास जताया कि नागताल पर्यटन विकास जल्द ही धरातल पर दिखाई देगा। उनका कहना है—
“नागताल सिर्फ झील नहीं, बल्कि एक अनोखा प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थल है। इसे विकसित किया गया तो पूरा त्रियुगीनारायण क्षेत्र पर्यटन का नया हब बन सकता है।”
स्थानीय जनता में उत्साह, विकास को लेकर बढ़ी उम्मीदें
अब स्थानीय लोगों में यह उम्मीद जग चुकी है कि प्रस्ताव के स्वीकृत होते ही नागताल आने वाले वर्षों में राज्य के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शुमार होगा। इससे क्षेत्र की पहचान बढ़ेगी ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।