देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ की नीति एक बार फिर धरातल पर गरजती दिखाई दी है। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी खरीद में हुए करोड़ों के बड़े घोटाले पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सीएम ने न केवल निलंबन के आदेश दिए, बल्कि पूरे प्रकरण की बाल की खाल निकालने के लिए एक संयुक्त जांच समिति का भी गठन कर दिया है।
क्या है करोड़ों का ‘वर्दी घोटाला’?
होमगार्ड्स के जवानों के लिए हर साल वर्दी, जूते, बेल्ट और कैप जैसी सामग्रियों की खरीद होती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बजट में इस खरीद के नाम पर जमकर बंदरबांट की गई। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
- चहेतों को फायदा: टेंडर की शर्तों को इस तरह मरोड़ा गया कि केवल खास ठेकेदार ही इसमें फिट बैठें। योग्य फर्मों को जानबूझकर बाहर का रास्ता दिखाया गया।
- महंगे दाम, रद्दी क्वालिटी: बाजार भाव से 20% से 40% अधिक दरों पर सामान खरीदा गया। घटिया क्वालिटी की सामग्री को ‘हाई क्वालिटी’ बताकर बिल पास करा लिए गए।
- कागजों में वर्दी, स्टॉक खाली: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड में तो खरीद दिखाई गई, लेकिन असल में सामान विभाग पहुंचा ही नहीं। स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक सामान की मात्रा में जमीन-आसमान का अंतर मिला।
- फर्जी दस्तावेज: तकनीकी योग्यता साबित करने के लिए सप्लायरों ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया, जिसे अधिकारियों ने आंख मूंदकर हरी झंडी दे दी।
सांठगांठ और कमीशन का ‘खेल’
घोटाले की स्क्रिप्ट टेंडर नोटिस से ही लिख दी गई थी। अधिकारियों और सप्लायरों के बीच कमीशन का खेल पहले ही तय हो चुका था। सैंपल टेस्टिंग में जो कमियां मिलीं, उन्हें रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। बिना उचित दस्तावेजों के ही करोड़ों का भुगतान जारी कर दिया गया। जब शिकायतें बढ़ीं, तो महानिदेशक होमगार्ड्स की जांच रिपोर्ट ने डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया।
“भ्रष्टाचारी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा” – CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि देवभूमि में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।
सीएम का कड़ा रुख: “हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले और नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों को बख्शने का सवाल ही पैदा नहीं होता। संयुक्त जांच समिति हर फाइल, हर बिल और हर सप्लायर की भूमिका की गहराई से जांच करेगी।”
अब आगे क्या?
गठित की गई संयुक्त जांच समिति अब खरीद प्रक्रिया से जुड़े तमाम दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड्स को खंगालेगी। माना जा रहा है कि इस जांच की आंच विभाग के कुछ अन्य बड़े चेहरों तक भी पहुंच सकती है।