देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के जांबाज सपूतों ने एक बार फिर दुनिया के सामने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर “हौसले बुलंद हों, तो कोई भी शिखर ऊंचा नहीं होता।” देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट के कुशल नेतृत्व में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की 16 सदस्यीय टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट एवरेस्ट’ पर तिरंगा लहराकर इतिहास रच दिया है। इस जांबाज टीम ने काठमांडू से मात्र 20 दिनों के भीतर एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचकर एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है।महीनों की कड़ी तपस्या और ट्रेनिंग से मिली सफलतानेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के प्रवक्ता ने इस ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे महीनों की कड़ी योजना, सैन्य अनुशासन और तकनीकी परिशुद्धता है।अक्टूबर 2025: मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में ही इस टीम ने गढ़वाल हिमालय के बेहद दुर्गम ‘माउंट सतोपंथ’ (7075 मीटर) का सफल आरोहण किया था।शीतकालीन प्रशिक्षण: इसके बाद टीम ने लाहौल-स्पीति में डोगरा स्काउट्स के साथ हाड़ कंपा देने वाली ठंड में ‘चरम शीतकालीन बर्फ प्रशिक्षण’ लिया।माउंट कानामो फतह: इस कठिन ट्रेनिंग के दौरान टीम ने ‘माउंट कानामो’ (5975 मीटर) को फतह कर एवरेस्ट विजय का मजबूत रास्ता तैयार किया था।अभियान में शामिल रहे उत्तराखंड के ये ‘वीर सपूत’दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भारत और NSG का मान बढ़ाने वाली इस टीम में उत्तराखंड का भारी दबदबा रहा:मेयर अखिलेश भट्ट (अभियान लीडर): वर्तमान में देहरादून के इंद्रापुर निवासी मेजर अखिलेश मूल रूप से घनसाली (टिहरी गढ़वाल) के रहने वाले हैं।सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी (डिप्टी लीडर): पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कंडाई निवासी सूबेदार सुरेश ने अभियान में ‘Expedition Deputy Leader’ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।नायक राहुल सिंह: चमोली जिले के ग्राम सेरा के रहने वाले हैं।नायक पंकज सिंह दोसाद: अल्मोड़ा जिले के ग्राम ल्वेशाल के निवासी हैं।कमांडो गौतम बुटोला: सीमांत जिले उत्तरकाशी के रहने वाले जांबाज ब्लैक कैट कमांडो हैं।’सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ का जीवंत उदाहरणNSG प्रवक्ता ने कहा कि यह मिशन नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के मूल ध्येय ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ का एक जीवंत उदाहरण है। मेजर अखिलेश भट्ट और उत्तराखंड के जांबाज जवानों ने बेहद विपरीत और जानलेवा हालातों में जिस तरह पूरी टीम को सुरक्षित शिखर तक पहुंचाया, वह हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा की बात है।यह केवल NSG की जीत नहीं है, बल्कि पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े देवभूमि के साहस, नेतृत्व और डीएनए की जीत है। इन जवानों ने देश और दुनिया को दिखा दिया कि उत्तराखंड का बेटा जब कुछ ठान लेता है, तो एवरेस्ट भी उसके सामने झुक जाता है। इस ऐतिहासिक अभियान ने राज्य के युवाओं को संदेश दिया है कि कड़े अनुशासन और दृढ़ संकल्प से दुनिया का हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।