पौड़ी। जनपद के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित हेरिटेज म्यूजियम की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में म्यूजियम परियोजना की प्रगति का जायजा लेते हुए इसे जनपद की ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान निर्माणदायी संस्था ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से म्यूजियम के प्रस्तावित स्वरूप और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्रियों की विस्तृत जानकारी दी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह म्यूजियम जनपद पौड़ी गढ़वाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को समग्र रूप में प्रदर्शित करेगा।
म्यूजियम में पारंपरिक ढोल-दमाऊ, प्राचीन आभूषण एवं वेशभूषा, दुर्लभ छायाचित्र और हिमालय से संबंधित थ्री-डी प्रस्तुतियां शामिल की जाएंगी, जिससे आगंतुकों को क्षेत्र की विरासत का जीवंत अनुभव मिल सके।
पांच थीम आधारित दीर्घाएं होंगी आकर्षण का केंद्र
प्रस्तावित म्यूजियम को पांच थीम आधारित हॉल में विकसित किया जाएगा—
विरासत भूमि हॉल: जनपद के ऐतिहासिक विकास और प्राचीन सभ्यता का प्रदर्शन।
वीर भूमि हॉल: शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और सैन्य परंपराओं को समर्पित।
लोक संस्कृति हॉल: पारंपरिक वाद्य यंत्र, वेशभूषा, आभूषण और लोक परंपराओं की झलक।
तपोभूमि हॉल: प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों की जानकारी।
प्राकृतिक हॉल: हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का आधुनिक तकनीक से प्रस्तुतीकरण।
स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
म्यूजियम परिसर में पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों पर आधारित कैफेटेरिया की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को 28 फरवरी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सके।
यह हेरिटेज म्यूजियम न केवल जनपद की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।