श्रीनगर, फरवरी 2026।
रात का सन्नाटा, ठंडी हवा और सुनसान सड़क… लेकिन इन हालातों ने हौसलों को नहीं रोका। एलयूसीसी (LUCC) घोटाले में अपनी जमा-पूंजी गंवाने वाली श्रीनगर की एक दर्जन से अधिक महिलाएं न्याय की मांग को लेकर पैदल ही दिल्ली की ओर बढ़ रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि वे महीनों से स्थानीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने राजधानी नई दिल्ली तक मार्च करने का निर्णय लिया। उनका आरोप है कि जांच की रफ्तार बेहद धीमी है और अब तक पीड़ितों को कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है।
“हम मां हैं, कमजोर नहीं”
मार्च में शामिल महिलाओं ने कहा कि वे सिर्फ अपने पैसों की वापसी नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहती हैं। उनका कहना है कि “जब मां सड़क पर उतरती है, तो सिर्फ रास्ते नहीं बदलते… सिस्टम बदलने लगते हैं।”
रात के अंधेरे में भी पैदल चलती इन महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। स्थानीय लोग भी रास्ते में उन्हें समर्थन दे रहे हैं और कई सामाजिक संगठनों ने उनके आंदोलन को नैतिक समर्थन देने की बात कही है।
प्रशासन सतर्क
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की है, लेकिन आंदोलनकारी अपने फैसले पर अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक उच्चस्तरीय जांच और धनवापसी की स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
यह आंदोलन अब सिर्फ एक वित्तीय घोटाले का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह भरोसे, न्याय और जवाबदेही की लड़ाई बन चुका है।