कीर्तिनगर और देवप्रयाग क्षेत्र में बढ़ती गुलदार (तेंदुआ) की घटनाओं को लेकर गंभीरता दिखाते हुए नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने मलेथा स्थित एक निजी होटल में व्यापक कार्यशाला आयोजित की। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और मीडिया विशेषज्ञों ने भाग लिया और वन्य जीव–मानव संघर्ष के व्यावहारिक समाधान पर विस्तृत मंथन किया।
कार्यक्रम का संचालन कीर्ति नेगी ने किया। मुंबई से आए मीडिया विशेषज्ञ विराट सिंह ने डिजिटल दौर में फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एआई आधारित फर्जी पोस्ट और अपुष्ट जानकारियां लोगों में अनावश्यक भय और दहशत पैदा कर देती हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों में मीडिया की भूमिका तथ्यों पर आधारित, संतुलित और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की होनी चाहिए, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े, भ्रम नहीं।
तितली ट्रस्ट के संजय सोनी ने वन्य जीव–मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल विभागीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। “स्थायी समाधान के लिए जनभागीदारी और आपसी समन्वय अनिवार्य है,” उन्होंने कहा।
नगर पालिका परिषद देवप्रयाग की अध्यक्ष ममता देवी ने स्वच्छता और सतर्कता को प्रमुख उपाय बताते हुए लोगों से घरों के आसपास कूड़ा इकट्ठा न होने देने और झाड़ियों की नियमित सफाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी घटनाओं को रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।
नरेंद्रनगर वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी दिगांत नायक ने क्षेत्रवासियों से वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल देने की अपील की।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि वन विभाग और स्थानीय जनता के संयुक्त प्रयासों से ही ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी विधानसभा सत्र में उत्तराखंड सरकार से त्वरित प्रतिक्रिया (आरआर) टीम के गठन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कार्यशाला में प्रमुख देवप्रयाग विनोद बिष्ट, एसडीओ सुरेंद्र चंद्र पैन्यूली, वन क्षेत्राधिकारी देवप्रयाग मदन रावत, वन क्षेत्राधिकारी कीर्तिनगर संजय बेलवाल, प्रधान संगठन अध्यक्ष कीर्तिनगर वासुदेव भट्ट, प्रधान लक्ष्मोली सुरेश सिंह सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।