चंपावत। उत्तराखंड के पहाड़ों में महिलाओं का साहस किसी मिसाल से कम नहीं है। चंपावत जिले में एक बार फिर ‘पहाड़ की नारी’ के अदम्य साहस की कहानी सामने आई है। यहाँ एक महिला ने अपनी जान की परवाह न करते हुए, गुलदार (तेंदुए) के चंगुल में फंसी अपनी सहेली को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।घास काटने गई महिलाओं पर अचानक हमलामिली जानकारी के अनुसार, घटना रविवार की है जब चंपावत के ग्रामीण इलाके में सीता देवी और उनकी साथी गीता देवी अन्य महिलाओं के साथ जंगल में घास काटने गई थीं। सभी महिलाएं अपने काम में मशगूल थीं कि तभी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने अचानक गीता देवी पर हमला कर दिया।गुलदार ने पलक झपकते ही गीता को दबोच लिया और उन्हें घसीटने की कोशिश करने लगा। अचानक हुए इस हमले से मौके पर चीख-पुकार मच गई।न डरी, न पीछे हटी: सीता ने पेश की मिसालजहाँ ऐसी स्थिति में कोई भी दहशत में आ जाए, वहीं सीता देवी ने भागने के बजाय अपनी सहेली को बचाने का फैसला किया। सीता ने बिना देर किए पास पड़े पत्थरों को उठाना शुरू किया और पूरी ताकत से गुलदार पर बरसाना शुरू कर दिया।सटीक निशाना: सीता ने एक के बाद एक कई पत्थर गुलदार पर फेंके।हौसले की जीत: पत्थरों की बौछार और सीता के निडर रवैये को देख गुलदार सहम गया।जान बचाई: खुद को घिरता देख और लगातार हो रहे प्रहार से घबराकर गुलदार ने गीता को छोड़ दिया और घने जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।घायल गीता का चल रहा उपचारगुलदार के हमले में गीता देवी को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद अन्य ग्रामीणों की मदद से उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर मदद मिलने और सीता के साहसी कदम की वजह से गीता की जान बच सकी।इलाके में दहशत, वन विभाग को सूचनाइस घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों ने वन विभाग से इलाके में गश्त बढ़ाने और आदमखोर होते गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है।”अगर सीता ने हिम्मत न दिखाई होती, तो आज बड़ी अनहोनी हो जाती। उसने अपनी सहेली के लिए जो किया, वह हम सभी के लिए गर्व की बात है।” — स्थानीय ग्रामीण