चमोली/श्रीनगर गढ़वाल:
उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक मांगल गीतों को वैश्विक पहचान दिलाने वाली डॉ. नंदा सती को राज्य के प्रतिष्ठित ‘तीलू रौतेली पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है। चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लॉक की ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर लोकसंगीत और शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिखने वाली डॉ. नंदा सती की इस उपलब्धि से संपूर्ण सीमांत क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
गांव की चौपाल से डिजिटल वर्ल्ड तक का सफर
वर्ष 2018 से गांव की बुजुर्ग महिलाओं के बीच बैठकर पारंपरिक मांगल गीतों को सीखना शुरू करने वाली नंदा सती ने इन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ा। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से उत्तराखंड के पौराणिक लोकगीतों और मांगल गायन को देश-दुनिया तक पहुंचाया। आज वे उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यशालाएं आयोजित कर नई पीढ़ी को मांगल गायन का विधिवत प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में अनुकरणीय उपलब्धियां
संस्कृति संरक्षण के साथ-साथ नंदा सती ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:
- अकादमिक श्रेष्ठता: संगीत विषय में एम.ए. के दौरान सर्वोच्च अंक प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया।
- अभूतपूर्व रिकॉर्ड: लगातार चार बार यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
- अध्यापन कार्य: वर्तमान में वे हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही श्रीनगर स्थित एक निजी संगीत एकेडमी में भी सेवाएं दे रही हैं।
उत्तराखंड में ‘मांगल गर्ल’ के नाम से लोकप्रिय हो चुकीं डॉ. नंदा सती की यह उपलब्धि राज्य की उन तमाम ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर समाज में विशेष पहचान बनाना चाहती हैं।