नई दिल्ली/लखनऊ:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के लखनऊ अर्बन कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (LUCC) पोंजी घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों की 30 करोड़ रुपये से अधिक की चल और अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।
कार्रवाई की मुख्य बातें:
- फ्रीज की गई संपत्तियां: ईडी की इस कार्रवाई में मुख्य आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के कई बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), भूखंड और लग्जरी संपत्तियां शामिल हैं।
- पोंजी स्कीम के जरिए ठगी: LUCC सोसाइटी पर आरोप है कि उसने आम जनता को बेहद कम समय में उच्च रिटर्न और पैसे दोगुना करने का लालच देकर पोंजी स्कीम के जरिए हजारों करोड़ रुपये जुटाए।
- लाखों निवेशक प्रभावित: उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों छोटे निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी इस क्रेडिट सोसाइटी में लगाई थी, जो बाद में डूब गई।
जांच में हुआ खुलासा:
ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि निवेशकों से एकत्र किए गए फंड का इस्तेमाल क्रेडिट सोसाइटी के उद्देश्यों के बजाय व्यक्तिगत अचल संपत्ति खरीदने, बेनामी खातों में ट्रांसफर करने और फर्जी कंपनियों (Shell Companies) के जरिए फंड डायवर्ट करने में किया गया।
राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई विभिन्न प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर ईडी ने इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी बेनामी संपत्तियों पर भी जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।