श्रीनगर (उत्तराखंड): उम्र भले ही 82 वर्ष हो, लेकिन समाज के प्रति सोच ऐसी जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन जाए। टिहरी जिले के निवासी कलम सिंह रावत ने मृत्यु के पश्चात अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर पहुंचकर देहदान का औपचारिक पंजीकरण कराया।
मुख्य झलकियां:
- परिचय पत्र किया गया जारी: एनाटॉमी विभाग में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कलम सिंह रावत को देहदान का आधिकारिक परिचय पत्र सौंपा गया।
- ‘देहदान ही वास्तव में महादान’: मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने उनके इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे एमबीबीएस और पैरामेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
- परिवार की सर्वसम्मति: कलम सिंह ने पंडित सत्यानंद डंगवाल से मार्गदर्शन लेने और अपने परिवार के सभी सदस्यों की सहमति मिलने के बाद यह कदम उठाया।
“मृत्यु के बाद भी काम आए शरीर”
कलम सिंह रावत ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनके मन में काफी समय से यह इच्छा थी कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर समाज के काम आ सके। उन्होंने कहा, “यदि मेरे शरीर से चिकित्सा छात्र अध्ययन कर सकें और नियमानुसार किसी जरूरतमंद को अंगदान का लाभ मिल सके, तो इससे बड़ी आत्मसंतुष्टि मेरे लिए कोई नहीं होगी।”
सरल है देहदान की प्रक्रिया
पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कराने वाले एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल द्विवेदी ने बताया कि देहदान की प्रक्रिया बेहद सरल है। विभाग में निर्धारित प्रपत्र भरने और परिजनों की लिखित सहमति के बाद औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं। उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी जागरूक होकर इस पहल में आगे आने की अपील की।