मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब अपने पैतृक गांव टुंडी–बारमौं पहुंचे तो पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही ग्रामीण बड़ी संख्या में अपने लोकप्रिय नेता का स्वागत करने के लिए घरों से बाहर निकल आए।
गांव के प्रवेश द्वार पर बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और नौनिहालों ने पारंपरिक तरीके से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। ग्रामीणों ने ढोल–दमाऊं की थाप पर जीत का जश्न मनाया और कई स्थानों पर फूल वर्षा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने गांव में बिताए अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि टुंडी–बारमौं उनके संस्कारों की जन्मभूमि है, जिसने उन्हें संघर्ष, अनुशासन और समाजसेवा की सीख दी। उन्होंने कहा कि चुनाव में मिली जीत उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि वर्षों बाद जब उनका “अपना बेटा” मुख्यमंत्री के रूप में घर लौटा, तो पूरा गांव गर्व से भर उठा। कई बुजुर्ग आज भी उन्हें बचपन के नाम से संबोधित करते हैं, जिससे माहौल में भावनात्मक गर्माहट दिखाई दी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ग्रामीणों का विश्वास, प्रेम और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कई योजनाओं पर काम तेज करने का आश्वासन भी दिया।
टुंडी–बारमौं में मुख्यमंत्री के आगमन ने एक बार फिर गांव की गलियों, चौपालों और आंगनों को उत्साह और स्मृतियों से भर दिया। ग्रामीणों के लिए यह दिन ऐतिहासिक और यादगार बन गया।