नई दिल्ली | 07 जनवरी 2026
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित सोशल मीडिया दावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर उनके नाम को इस संवेदनशील मामले से जोड़ने वाली सामग्री को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक करार देते हुए उसे हटाने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस मिनी पुष्करना की एकल पीठ ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत अन्य संबंधित सोशल मीडिया हैंडल्स को आदेश दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर दुष्यंत गौतम से संबंधित सभी विवादास्पद पोस्ट, वीडियो और सामग्री हटाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा में सामग्री नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं जिम्मेदार होंगे और उन्हें उक्त कंटेंट हटाना होगा।
भविष्य में पोस्ट पर भी निगरानी के निर्देश
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई सामग्री पोस्ट की जाती है, तो याचिकाकर्ता को तत्काल सूचित किया जाए, ताकि वह कानूनी कार्रवाई कर सकें।
याचिका में क्या कहा गया
दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा था कि 24 दिसंबर 2025 को वायरल हुए एक वीडियो और कई सोशल मीडिया पोस्ट्स में उन्हें गलत तरीके से वर्ष 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा गया। याचिका में दावा किया गया कि यह सब उनकी छवि खराब करने की जानबूझकर रची गई साजिश है।
उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच में दुष्यंत गौतम का नाम कभी भी सामने नहीं आया और निचली अदालत पहले ही इस केस में अपना फैसला सुना चुकी है।
कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में माना कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही सामग्री से याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है और यह सामग्री तथ्यहीन एवं मानहानिकारक प्रतीत होती है।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य सहित तीन आरोपियों को निचली अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर एक कथित “VIP” की संलिप्तता को लेकर अफवाहें फैलाई गईं, जिनमें बाद में दुष्यंत गौतम का नाम जोड़ा गया। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इन दावों को प्रथम दृष्टया झूठा और मानहानिकारक माना है।