देहरादून।
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध धाम बदरीनाथ में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस संवेदनशील मुद्दे ने अब एक बेहद दिलचस्प और आक्रामक राजनीतिक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने इस विवाद में सीधे तौर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को आमने-सामने की बहस की चुनौती दे डाली है।
इस चुनौती को धरातल पर उतारने के लिए गणेश गोदियाल देहरादून के प्रेस क्लब में एक अनोखे और तीखे अंदाज में नजर आए। उन्होंने बकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें अपने बगल में एक ‘खाली कुर्सी’ रखी। इस खाली कुर्सी पर बकायदा ‘हेमंत द्विवेदी’ की नेमप्लेट लगाई गई थी। इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए गोदियाल ने यह संदेश दिया कि वे मंदिर समिति के अध्यक्ष के हर आरोप का आमने-सामने जवाब देने के लिए तैयार खड़े हैं, लेकिन आरोपों की राजनीति करने वाले खुद मैदान से नदारद हैं।
क्या है पूरा विवाद?
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित रूप से नकदी, सोने-चांदी के सिक्के और कीमती सामान की चोरी का मामला सामने आया था, जिसमें मंदिर समिति के एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर १४ दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
इस घटना के बाद से ही कांग्रेस सरकार और मंदिर समिति पर हमलावर है। विवाद तब और भड़क गया जब BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप मढ़ा कि गणेश गोदियाल जब २०१४ से २०१७ के बीच खुद मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तब उनके कार्यकाल में भी कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई थीं।
”हिम्मत है तो सामने आकर आरोप साबित करें”
इसी आरोप के जवाब में गणेश गोदियाल ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत द्विवेदी को सीधे ललकारा। बगल में खाली कुर्सी रखकर गोदियाल ने कहा:
”मैंने हेमंत द्विवेदी की चुनौती को स्वीकार किया था और इसीलिए आज उनके लिए यहां बकायदा कुर्सी लगाकर उनका इंतजार कर रहा था। अगर उनके आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो वे भागने के बजाय इस मंच पर मेरे सामने बैठें और जनता के सामने प्रमाण पेश करें। मैं अपने कार्यकाल के एक-एक पैसे और एक-एक फैसले का हिसाब सार्वजनिक रूप से देने को तैयार हूं।”
सरकार और BKTC को घेरा
गोदियाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान अध्यक्ष अपनी नाकामी और मंदिर में हुई ऐतिहासिक चोरी की जिम्मेदारी से बचने के लिए पुराने मामलों का राग अलाप रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी कर्मचारी को वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर बदरीनाथ भेजा गया था, जिससे वर्तमान नेतृत्व की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वर्तमान जांच समितियों पर अविश्वास जताते हुए एक बार फिर न्यायिक जांच (Judicial Probe) या विधानसभा की संयुक्त समिति से जांच कराने की मांग को दोहराया है।
इस ‘खाली कुर्सी’ वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी और BKTC के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी कांग्रेस के इस आक्रामक दांव का क्या जवाब देते हैं।