बदरीनाथ (उत्तराखंड) |
देवभूमि उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव, भगवान श्रीहरि नारायण के धाम ‘बदरीनाथ’ के कपाट आज सुबह पूरे विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। नारद मुनि की तपस्थली और भू-बैकुंठ के नाम से विख्यात इस धाम के द्वार खुलते ही पूरी नीलकंठ घाटी ‘जय बदरीविशाल’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठी।
फूलों से सजा धाम और सेना के बैंड की धुन
कपाट उद्घाटन के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर को सैकड़ों क्विंटल देशी-विदेशी फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। कपाट खुलने की प्रक्रिया ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हुई, जिसके साक्षी हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु बने। मुख्य द्वार खुलते ही भारतीय सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
रावल जी ने संपन्न की विशेष पूजा
परंपरानुसार, धाम के मुख्य पुजारी (रावल जी) ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान नारायण की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को भगवान के निर्वाण दर्शन और अखंड ज्योति के दर्शन प्राप्त हुए। मान्यता है कि कपाट खुलने के दिन अखंड ज्योति के दर्शन मात्र से व्यक्ति के जन्म-जन्मान्तर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी आस्था
धाम में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। देश-विदेश से पहुंचे हजारों तीर्थयात्रियों ने अलकनंदा नदी में स्नान कर भगवान के दर्शन किए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
शुभकामनाओं का तांता
मुख्यमंत्री और अन्य विशिष्ट गणमान्यों ने इस मंगलमय अवसर पर प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान बदरीविशाल विश्व का कल्याण करें और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।