देहरादून: महिला आरक्षण पर सियासत तेज, मुख्यमंत्री धामी के साथ सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएंदेहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज ‘नारी शक्ति’ के हुंकार से गूँज उठी। परेड ग्राउंड में भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित ‘महिला जन आक्रोश रैली’ में हजारों की संख्या में महिलाओं ने शिरकत कर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई। इस रैली के जरिए भाजपा ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।मुख्य बिंदु:नेतृत्व: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं सड़क पर उतरकर महिलाओं का उत्साहवर्धन करते नजर आए।मुद्दा: 33% महिला आरक्षण बिल के क्रियान्वयन में विपक्ष द्वारा डाली जा रही कथित बाधाएं।स्थान: देहरादून का ऐतिहासिक परेड ग्राउंड।विपक्ष पर बरसे मुख्यमंत्री धामीरैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया, लेकिन विपक्ष इसे लटकाने और महिलाओं को भ्रमित करने की राजनीति कर रहा है।”यह रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन शक्तियों को जवाब है जिन्होंने हमेशा महिलाओं के अधिकारों को नजरअंदाज किया है। उत्तराखंड की माताएं और बहनें अपने अपमान का बदला लेना जानती हैं।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी”महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं”बीजेपी नेताओं और महिला मोर्चा की पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल आरक्षण बिल के क्रियान्वयन में तकनीकी अड़चनें पैदा कर रहे हैं। रैली में शामिल महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया, जिन पर नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों की मांग के नारे लिखे थे।रैली की बड़ी बातें:भारी उपस्थिति: प्रदेश के कोने-कोने से आई महिलाओं के कारण परेड ग्राउंड और आसपास की सड़कें केसरिया रंग में रंगी नजर आईं।दिग्गज नेताओं की मौजूदगी: रैली में कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और संगठन के बड़े पदाधिकारियों ने हिस्सा लेकर एकजुटता दिखाई।विपक्ष की घेराबंदी: भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल वोट बैंक की राजनीति करती है, जबकि भाजपा धरातल पर सशक्तिकरण की पक्षधर है।सियासी मायनेविशेषज्ञों का मानना है कि इस जन आक्रोश रैली के जरिए भाजपा ने आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को साधने की बड़ी कवायद की है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ महिलाओं को ‘प्रदेश की रीढ़’ माना जाता है, आरक्षण और सम्मान का मुद्दा बेहद संवेदनशील और निर्णायक साबित हो सकता है।रैली के समापन पर महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगी। इस शक्ति प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में महिला आरक्षण का मुद्दा राज्य की सियासत का केंद्र बना रहेगा।