श्रीनगर। समाजसेवी एवं वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में तथा देश की शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार की मांग को लेकर रविवार शाम श्रीनगर में छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को तत्काल भंग करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और देश में एक पारदर्शी व विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू करने की पुरजोर मांग उठाई।
बिड़ला परिसर से गोला पार्क तक गरजा आक्रोश
गढ़वाल विश्वविद्यालय छात्रसंघ उपाध्यक्ष शिवांक नौटियाल के नेतृत्व में यह रैली बिड़ला परिसर के मुख्य द्वार से शुरू हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए रैली श्रीनगर बाजार के प्रमुख मार्गों से गुजरी और गोला पार्क पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गई। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कथित अनियमितताओं पर गहरा रोष व्यक्त किया।
“लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़”
गोला पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए छात्रसंघ उपाध्यक्ष शिवांक नौटियाल, छात्र नेता रोबिन असवाल, अतुल सती, रेशमा, मोनिका, प्रियंका खत्री और रंजना ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले कुछ समय से देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में:
- पेपर लीक की घटनाएं
- तकनीकी खामियां और परीक्षा प्रबंधन में लापरवाही
- परीक्षा प्रणाली की गिरती विश्वसनीयता
वक्ताओं ने कहा कि इन गंभीर अनियमितताओं के कारण देश के लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। वर्तमान परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है, जिससे रात-दिन मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
”सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह छात्रों के हितों की रक्षा करते हुए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करे। एनटीए के स्थान पर एक स्वतंत्र एवं विश्वसनीय ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही परीक्षा विवादों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।”
— प्रदर्शनकारी छात्र नेता
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि छात्रों के भविष्य और युवाओं के सपनों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो इस आंदोलन को राष्ट्रव्यापी और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस आक्रोश मार्च और सभा में सरस्वती देवी, डॉ. योगेश कड़पाल, युगराज सिंह, पारूल, प्रो. एस.एस. रावत, डॉ. अरुण कुकशाल, आयुष वेदवाल सहित भारी संख्या में छात्र, प्राध्यापक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।