देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आगामी विधानसभा सत्र का रास्ता साफ हो गया है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में यह सत्र 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक तीन दिनों के लिए प्रस्तावित किया गया है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गैरसैंण में सत्र का आयोजन राजनीतिक और क्षेत्रीय दोनों ही दृष्टियों से बेहद अहम माना जा रहा है।
चुनावी साल और राजनीतिक महत्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह छठा विधानसभा सत्र होगा। राज्य मंत्रिमंडल ने सत्र के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था, जिसके बाद 13 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों में इन तारीखों पर मुहर लगी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले पहाड़ी राजधानी में सत्र बुलाकर सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और शासन के विकेंद्रीकरण का एक मजबूत संदेश देने का प्रयास कर रही है।
इन मुद्दों पर टिकी रहेंगी निगाहें
गैरसैंण में सत्र का आयोजन हमेशा से राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास से जुड़ा रहा है। चूंकि सत्र की आधिकारिक कार्यसूची (एजेंडा) अभी जारी नहीं हुई है, फिर भी पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर सदन के भीतर और बाहर गहमागहमी रहने के पूरे आसार हैं:
- पलायन और रोजगार: पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: पर्वतीय जिलों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, डॉक्टरों की कमी और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं।
- बुनियादी ढांचा: सड़क संपर्क, ऑल वेदर रोड से जुड़े अपडेट और दूरदराज के गांवों में कनेक्टिविटी प्रमुख विषय हो सकते हैं।
तीन दिन का छोटा सत्र, बड़े सवालों की उम्मीद
तीन दिन के इस संक्षिप्त सत्र में सरकार सदन के पटल पर क्या कार्यसूची रखती है और विपक्ष पहाड़ के मुद्दों को किस प्रकार उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। चुनाव की आहट के बीच गैरसैंण की आबोहवा में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सत्र के दौरान पर्वतीय विकास को लेकर क्या खास घोषणाएं या चर्चाएं सामने आती हैं।