नई दिल्ली/देहरादून: वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम का एक नया अध्याय कल से शुरू होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर बनकर उभरा है।वन्यजीवों के लिए ‘सुरक्षित गलियारा’यह एक्सप्रेसवे राजाजी नेशनल पार्क के संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है। वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, इसके 12 किलोमीटर के हिस्से को जमीन से ऊपर (एलिवेटेड) बनाया गया है।प्राकृतिक आवागमन: अब हाथी, हिरण और अन्य जंगली जानवर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या दुर्घटना के डर के सड़क के नीचे अपने प्राकृतिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकेंगे।पर्यावरण संतुलन: विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट “विकास और पर्यावरण” के बीच संतुलन का एक वैश्विक मॉडल पेश करता है।सफर में समय की भारी बचतकरीब 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी सिमट जाएगी:समय: पहले जहाँ 6 घंटे लगते थे, अब यात्री मात्र 2.5 से 3 घंटे में सफर पूरा कर सकेंगे।कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को नई मजबूती देगा।आर्थिक और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावाइस महापरियोजना के शुरू होने से न केवल तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सुविधा होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:व्यापार और उद्योग: माल ढुलाई में समय और लागत की कमी आएगी।रोजगार: एक्सप्रेसवे के किनारे नए व्यावसायिक केंद्र विकसित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।पर्यटन: ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून जाने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।आधुनिक तकनीक का इस्तेमालएक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जिसमें सुरक्षित सफर के लिए स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बेहतर सड़क डिजाइन का उपयोग किया गया है।प्रधानमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट कल से आम जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा, जिससे दिल्ली-NCR और उत्तराखंड के बीच का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि बेहद सुखद और रोमांचक भी बनेगा।