देहरादून। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने भवन निर्माण के नक्शों को पास करने के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। अब यदि किसी भी आवासीय या व्यावसायिक भवन के नक्शे (Building Plan) में जमीन पर पहले से मौजूद पेड़ों या किसी पुरानी संरचना (Existing Structure) की जानकारी छिपाई गई, तो उस आवेदन को सीधे खारिज (Reject) कर दिया जाएगा।
प्राधिकरण का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और शहर के नियोजित विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
क्या हैं नए दिशा-निर्देश (Guidelines)?
MDDA के नए नियमों के मुताबिक, अब नक्शा पास कराने के लिए आवेदन करते समय भूखंड (Plot) की सटीक और पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
पेड़ों की सटीक गिनती: जमीन पर जितने भी पेड़ मौजूद हैं, उनकी सही संख्या और स्थिति को नक्शे में दिखाना होगा।
मौजूदा निर्माण की जानकारी: यदि भूखंड पर पहले से कोई पुराना कमरा, दीवार या अन्य ढांचा बना हुआ है, तो उसे भी मानचित्र में स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा।
भ्रामक जानकारी पर एक्शन: यदि मौके पर जांच (Site Verification) के दौरान नक्शे और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया, तो बिना किसी नोटिस के आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि लोग नक्शा पास कराते समय जमीन पर मौजूद हरे पेड़ों की जानकारी छुपा लेते हैं और बाद में निर्माण के दौरान उन्हें चुपके से काट दिया जाता है। इसके अलावा, पुराने अवैध निर्माण को छिपाकर नया नक्शा पास कराने की कोशिशें भी होती हैं। MDDA का ऑटो डीसीआर (Auto DCR) सिस्टम और ऑनलाइन मैप अप्रूवल तकनीक अब इन गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए और सख्त कर दी गई है।
महत्वपूर्ण नोट: आर्किटेक्ट और आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे साइट का सही सर्वे करने के बाद ही नक्शा तैयार करें, ताकि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन न हो और नक्शा अटकने या खारिज होने जैसी परेशानियों से बचा जा सके।
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