रामनगर (नैनीताल): पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में एडवेंचर का शौक लेकर गई एक बेटी के अचानक लापता होने से एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नैनीताल जिले के रामनगर स्थित चिल्किया गांव की रहने वाली 24 वर्षीय बबीता पांडे उत्तरकाशी में ट्रेकिंग के दौरान रहस्यमय तरीके से लापता हो गई है। लापता हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घर पर बूढ़ी मां अंजू पांडे की पथराई आंखें हर आहट पर अपनी लाडली की राह देख रही हैं।26 मई को ट्रेकिंग के लिए निकली थी बबीतापरिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, बबीता पांडे बीते 26 मई को उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए घर से निकली थी। इस एडवेंचर ट्रिप पर उसके साथ दो युवक और एक अन्य साथी भी मौजूद थे। सब कुछ ठीक चल रहा था और बबीता लगातार अपने परिवार के संपर्क में थी, लेकिन किसे पता था कि यह सफर एक अनसुलझी पहेली बन जाएगा।’मां, ट्रेकिंग पूरी होते ही घर आ जाऊंगी’ — आखिरी बातचीतलापता होने से ठीक एक दिन पहले, 29 मई की सुबह बबीता ने अपनी मां अंजू पांडे को फोन किया था। दोनों के बीच काफी लंबी बातचीत हुई। बबीता ने बेहद खुशमिजाज अंदाज में अपनी मां को हौसला देते हुए कहा था:”मां, तुम चिंता मत करना। बस ट्रेकिंग पूरी होने ही वाली है, इसके खत्म होते ही मैं सीधे घर लौट आऊंगी।”मां को अंदाजा भी नहीं था कि बेटी की यह आवाज उनके लिए आखिरी संपर्क साबित होने वाली है। इस फोन कॉल के अगले ही दिन यानी 30 मई को बबीता के साथ गए साथियों ने परिजनों को सूचना दी कि बबीता अचानक लापता हो गई है। इस खबर ने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।सस्पेंस और साथियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल?बबीता के अचानक इस तरह रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:अचानक कैसे गायब हुई बबीता? ट्रेकिंग के दौरान वह साथियों की नजरों से कैसे ओझल हो गई?साथियों का बयान: बबीता के साथ गए दोनों युवकों और अन्य साथी से इस मामले में क्या इनपुट मिले हैं, पुलिस इसकी गहराई से जांच कर रही है।सर्च ऑपरेशन: उत्तरकाशी के उस दुर्गम ट्रेकिंग रूट पर रेस्क्यू टीमें और स्थानीय पुलिस बबीता की तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कामयाबी हाथ नहीं लगी है।थम गई है परिवार की दुनियाबबीता के लापता होने की खबर के बाद से चिल्किया गांव स्थित उसके घर में कोहराम मचा हुआ है। मां अंजू पांडे का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार अपनी बेटी के उस आखिरी फोन कॉल को याद कर रही हैं। पूरा गांव इस समय स्तब्ध है और हर कोई बबीता की सलामती की दुआ मांग रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर अब बबीता को सकुशल ढूंढ निकालने का भारी दबाव है।