अल्मोड़ा:उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद ने देश की रक्षा के लिए अपना एक और वीर सपूत खो दिया है। पांडेखोला निवासी युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। रविवार को शहीद का पार्थिव शरीर उनके गृह जनपद अल्मोड़ा लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ विश्वनाथ घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े भाई अमित गोस्वामी ने अश्रुपूर्ण आंखों से उन्हें मुखाग्नि दी। वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।राजौरी में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान हुआ हादसामिली जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के गंभीर मुगला और डोरेमल के जंगलों में भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से एक बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में गश्त करते समय अचानक संतुलन बिगड़ने से लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी गहरी खाई में गिर गए। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली और देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।दो दिन बाद बनने वाले थे कैप्टन, इंग्लैंड का ऑफर ठुकराकर चुनी थी सेनामहज 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी वर्तमान में 5 असम रेजिमेंट में तैनात थे। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका चयन एनडीए (NDA) के साथ-साथ कैट, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में भी हुआ था। लेकिन सात समंदर पार जाने के बजाय उन्होंने देशसेवा की राह चुनी। वर्ष 2023 में वे सेना में शामिल हुए और जून 2024 में उन्हें कमीशन प्राप्त हुआ। गर्व और दुख की बात यह है कि महज दो दिन बाद ही उनकी पदोन्नति होने वाली थी और वे कैप्टन बनने वाले थे।सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के छात्र और ग्राफिक एरा के रहे सिल्वर मेडलिस्टशहीद बीरेश्वर गोस्वामी का परिवार वर्तमान में पांडेखोला के पास अथरबनी ग्राम पंचायत में रहता है, जबकि उनका पैतृक गांव बाड़ी बग्वालीपोखर (सोमेश्वर) है। उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हैं और माता सरस्वती गोस्वामी प्राथमिक विद्यालय वलसा में प्रधानाध्यापिका हैं।बीरेश्वर ने कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल रानीखेत और 9 से 12 तक की शिक्षा सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातक किया, जहां वे रजत पदक (सिल्वर मेडलिस्ट) विजेता रहे थे।शहादत को नमन, नम आंखों से दी विदाईलेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत की खबर से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। विश्वनाथ घाट पर सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोगों ने नम आंखों से वीर शहीद को नमन किया। क्षेत्रवासियों ने कहा कि लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का यह सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र सदैव याद रखेगा और उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।