गोपेश्वर/नंदप्रयाग:
नंदप्रयाग-नंदनगर मोटर मार्ग पर सोमवार सुबह चमन मंदिर के समीप अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर (पत्थर) गिरने के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क बंद होने की वजह से सुबह-सुबह अपने विद्यालयों और दफ्तरों के लिए निकले शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
शिक्षकों ने पेश की सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल
प्रशासनिक मदद का इंतजार करने के बजाय, ड्यूटी पर जा रहे शिक्षकों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और खुद ही मोर्चा संभाल लिया। सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए शिक्षकों ने स्वयं ही सड़क पर गिरे मलबे और पत्थरों को हटाने का काम शुरू कर दिया। उनके इस सामूहिक प्रयास से कुछ ही समय में मार्ग को आंशिक रूप से वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया, जिससे फंसे हुए यात्रियों को बड़ी राहत मिली। शिक्षकों की इस तत्परता और सराहनीय कार्य की स्थानीय लोगों और राहगीरों ने जमकर प्रशंसा की है।
“अगर शिक्षक आगे आकर रास्ता साफ करने की पहल न करते, तो हमें घंटों भूखा-प्यासा सड़क पर बिताना पड़ता। उनके इस हौसले को सलाम है।”
— एक स्थानीय यात्री
संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी तैनाती की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बरसात के मौसम में इस पूरे मार्ग पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा लगातार बना रहता है। आए दिन पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण यह सड़क बंद हो जाती है।
स्थानीय जनता ने संबंधित विभाग से मांग की है कि:
- मार्ग के सभी संवेदनशील स्थानों की नियमित निगरानी की जाए।
- सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल जेसीबी और आवश्यक मशीनें मौके पर भेजी जाएं।
- आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक स्थायी टीम तैनात रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग समय पर तत्परता दिखाए, तो स्कूली बच्चों, बीमार मरीजों और दैनिक यात्रियों को इस तरह की अनावश्यक और जोखिमभरी परेशानियों से बचाया जा सकेगा।
क्या आपके क्षेत्र में भी इस मानसून में सड़कों की स्थिति ऐसी ही बनी हुई है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में बताएं।