चमोली (कुरुड़): दशोली और बधाण की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की ऐतिहासिक ‘बड़ी जात यात्रा’ की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नंदा की पावन डोलियां सिद्धपीठ कुरुड़ के गर्भगृह से बाहर लाकर मंदिर परिसर में स्थापित की गईं। 5 सितंबर को मां नंदा की डोली विधि-विधान के साथ कैलास धाम के लिए प्रस्थान करेगी। यात्रा के इस पावन अवसर पर तीन दिवसीय ‘मां नंदा-राजराजेश्वरी बड़ी जात सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास मेला’ का भी भव्य शुभारंभ हो गया है।
तीन दिवसीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मेले का आगाज
कुरुड़ के गौड़ ब्राह्मणों द्वारा संपादित वैदिक पूजा-अर्चना के उपरांत दशोली और बधाण क्षेत्र की नंदा डोलियों को मुख्य द्वार के समीप श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान कराया गया है। श्रद्धालु 5 सितंबर की दोपहर तक मंदिर परिसर में मां नंदा के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। मेले के आयोजन से पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं उत्सव का माहौल बना हुआ है।

पारंपरिक लोकवाद्यों की धुनों के साथ पहुंचा ‘चौसिंग्या खाड़ू’
यात्रा का नेतृत्व करने वाला चार सींगों वाला ‘चौसिंग्या खाड़ू’ गुरुवार को सुंग गांव से कुरुड़ मंदिर परिसर पहुंचा। ग्रामीण पारंपरिक लोकवाद्यों की मधुर धुनों के साथ सुंग गांव निवासी रमेश सिंह बिष्ट की गोशाला में जन्मे इस अद्भुत खाड़ू को लेकर सिद्धपीठ पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना के बाद इसे मां नंदा को समर्पित किया। 5 सितंबर को डोली इसी खाड़ू की अगुआई में कैलास धाम के लिए प्रस्थान करेगी।
प्रशासनिक एवं धार्मिक तैयारियां पूर्ण
मेला समिति के अध्यक्ष सखबीर सिंह रौतेला और सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने जानकारी दी कि यात्रा और मेले से संबंधित सभी धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। 5 सितंबर की दोपहर बाद मां नंदा की डोली कैलास धाम की अपनी पावन यात्रा पर निकल पड़ेगी।
मुख्य आकर्षण एवं समय-सारणी:
- दर्शन की अवधि: 5 सितंबर की दोपहर तक (सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर परिसर में)
- कैलास धाम प्रस्थान: 5 सितंबर दोपहर बाद
- विशेष नेतृत्व: सुंग गांव का चौसिंग्या खाड़ू करेगा यात्रा का मार्गदर्शन