चमोली (उत्तराखंड):
उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकजात और आस्था का महाकुंभ मानी जाने वाली ‘नंदा देवी बड़ी जात 2026’ का विधिवत शुभारंभ हो गया है। मां नंदा देवी की भव्य डोली और पवित्र जात सिद्धपीठ कुरुड मंदिर से अपने अंतिम पड़ाव कैलाश (होमकुंड) के लिए प्रस्थान कर चुकी है। ढोल-दमाऊ की पारंपरिक धुन, वेद मंत्रों के उच्चारण और माता के जयकारों के साथ हजारों की संख्या में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा के साक्षी बन रहे हैं।

उत्तराखंड की लोक संस्कृति में मां नंदा देवी को क्षेत्र की ध्याणी (बेटी) के रूप में पूजा जाता है। यह यात्रा माता के अपने मायके से ससुराल (कैलाश) लौटने की भावुक और पवित्र परंपरा का प्रतीक है। कुरुड से शुरू हुई यह कठिन पैदल यात्रा दुर्गम पर्वतीय मार्गों, मनोरम बुग्यालों और कई पारंपरिक पड़ावों से होते हुए होमकुंड पहुंचेगी।
यात्रा से जुड़ी मुख्य जानकारी:
- प्रस्थान स्थल: सिद्धपीठ कुरुड (चमोली)
- अंतिम पड़ाव: कैलाश (होमकुंड)
- धार्मिक महत्व: मां नंदा देवी को बेटी स्वरूप मानकर कैलाश विदा करने की प्राचीन परंपरा।
- सुरक्षा व्यवस्था: प्रशासन और यात्रा प्रबंधन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के रहने, भोजन और स्वास्थ्य के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
समस्त क्षेत्र में इस समय भक्तिमय माहौल है। जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा माता की पालकी का भव्य स्वागत और पुष्पवर्षा की जा रही है।
इस पावन और अलौकिक यात्रा का हिस्सा बनें और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
जय माँ नंदा देवी! जय माँ राजेश्वरी!