देहरादून |
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और दिग्गज नेताओं ने देहरादून के परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए जोरदार प्रदर्शन करते हुए कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को दलित समाज की अस्मिता और संवैधानिक मर्यादाओं पर सीधा हमला करार दिया है।
- हल्द्वानी का घटनाक्रम: रामलीला मैदान में खरगे की जनसभा के बाद परिसर का ‘शुद्धिकरण’ (हवन) कराने का आरोप।
- देहरादून में प्रदर्शन: परेड ग्राउंड से सीएम आवास तक कांग्रेस का विशाल मार्च, बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस ने रोका।
- मुख्य मांग: ‘शुद्धिकरण’ में शामिल लोगों पर तत्काल एफआईआर और कांग्रेस नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस हों।
- शीर्ष नेतृत्व मौजूद: प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित वरिष्ठ नेता रहे शामिल।
सड़कों पर उतरा आक्रोश, पुलिस से तीखी झड़प
देहरादून के परेड ग्राउंड पर सुबह से ही हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जुटना शुरू हो गए थे। हाथों में पार्टी के झंडे, ‘SaveDemocracy’ के पोस्टर और सरकार विरोधी तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। जैसे ही मार्च हाथीबड़कला बैरियर के पास पहुंचा, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

“यह दलित समाज और लोकतंत्र का अपमान”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी का कहना है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ दलित नेता की सभा के बाद स्थल का ‘शुद्धिकरण’ करना संकीर्ण और छुआछूत वाली मानसिकता को दर्शाता है।
“लोकतंत्र में किसी वर्ग या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार आरोपियों को संरक्षण देने के बजाय उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई करे, वरना यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।”
कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि जब तक ‘शुद्धिकरण’ की घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती और पार्टी नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा।