धराली के प्राचीन कल्पकेदार मंदिर के लिए ग्रामीणों ने खुद उठाई पहल, पोकलेन मशीन से शुरू हुई मलबे की खुदाई
उत्तरकाशी (धराली):
बीते वर्ष धराली में आई विनाशकारी आपदा के मलबे में दबे प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को बाहर निकालने के लिए अब ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सरकारी स्तर पर आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने पर स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर मंदिर के उद्धार का बीड़ा उठाया है।
रविवार को शारदीय नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान के साथ इस कार्य का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सोमेश्वर देवता की पवित्र डोली की विशेष मौजूदगी रही। आचार्य और पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन और भूमि पूजन संपन्न कराया, जिसके बाद पोकलेन मशीन की मदद से मंदिर परिसर से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
आपदा में मलबे में समा गया था मंदिर
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष 5 अगस्त को खीर गंगा नदी में उग्र बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ गई थी। इस प्राकृतिक आपदा के कहर से प्राचीन कल्पकेदार मंदिर का ऊपरी गुंबद पूरी तरह ध्वस्त हो गया था, जबकि मंदिर का गर्भगृह और पूरा परिसर भारी मलबे के नीचे दब गया था।
ग्रामीणों पर पड़ रहा है आर्थिक भार
मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार और सचिव संजय पंवार ने मीडिया को जानकारी दी कि आपदा के इतने महीने बीत जाने और सरकार से कई बार गुहार लगाने व आश्वासन मिलने के बाद भी प्रशासन या विभाग द्वारा मंदिर की खुदाई का कार्य शुरू नहीं कराया गया था।
धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के प्रतीक इस प्राचीन मंदिर की स्थिति को देखते हुए आखिरकार ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से खुद ही पहल करने का निर्णय लिया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस मलबे की खुदाई और बचाव कार्य पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आने का अनुमान है, जिसे स्थानीय लोग और श्रद्धालु मिलकर वहन कर रहे हैं।
ग्रामीणों की इस साहसिक और निष्ठावान पहल से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि जल्द ही कल्पकेदार मंदिर मलबे से बाहर आएगा और क्षेत्र की खोई हुई आध्यात्मिक धरोहर का पुनरुद्धार हो सकेगा।