चमोली (उत्तराखंड)। प्रसिद्ध लोकजात/यात्रा के तहत मां नंदा राज राजेश्वरी की पवित्र डोली अपने धर्म भाई लाटू देवता के गंतव्य स्थल एवं सीमांत गांव ‘वाण’ पहुंच गई है। वाण गांव पहुंचने पर ग्रामीणों, ध्याणियों (बेटियों) और दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां नंदा की डोली का ढोल-दमाऊ की मधुर थाप, शंखनाद और पुष्प वर्षा के साथ भव्य एवं भावुक स्वागत किया।
मां नंदा की डोली के वाण गांव पहुंचते ही पूरा वातावरण “जय मां नंदा”, “जय लाटू देवता” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
प्रमुख आकर्षण एवं मुख्य बिंदु:
- धार्मिक और सांस्कृतिक संगम: वाण गांव को मां नंदा का अंतिम मानव आबादी वाला पड़ाव माना जाता है। यहां मां नंदा और उनके धर्म भाई लाटू देवता का पौराणिक मिलन देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- अश्रुपूरित आंखों से स्वागत व विदाई: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नंदा जब अपने मायके से ससुराल (कैलाश) की ओर प्रस्थान करती हैं, तो वाण गांव में उनके भाई लाटू देवता उन्हें कैलाश की ओर विदा करने के लिए साथ चलते हैं। इस दौरान स्थानीय महिलाओं द्वारा पारम्परिक ‘मांगल’ और ‘जागर’ गाकर वातावरण को बेहद भावुक कर दिया गया।
- पारंपरिक पूजा-अर्चना: लाटू देवता के मंदिर प्रांगण में डोली को विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। ध्याणियों ने मां नंदा को पारंपरिक चूड़ी, बिंदी और लाल चुनरी अर्पित कर अपनी सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी।
वाण गांव और लाटू देवता का पौराणिक महत्व

उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा में वाण गांव का विशेष स्थान है:
- अंतिम मानव बस्ती: हिमालयी क्षेत्र में उच्च हिमालयी बुग्यालों (जैसे बेदनी बुग्याल) की ओर बढ़ने से पहले वाण गांव इस मार्ग का अंतिम मानव निवास स्थान है।
- लाटू देवता का रहस्यमयी मंदिर: मान्यता है कि लाटू देवता मां नंदा के धर्म भाई हैं। वाण स्थित लाटू देवता के मंदिर का कपाट वर्ष में केवल एक बार (वैशाख पूर्णिमा) खुलता है। मंदिर के अंदर साक्षात नागराज रूप में विराजमान देवता की पूजा पुजारी आंख और मुंह पर पट्टी बांधकर करते हैं।
- कैलाश यात्रा का मुख्य पड़ाव: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वाण गांव से आगे लाटू देवता स्वयं मां नंदा के अंगरक्षक बनकर उच्च हिमालयी मार्ग पर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
मां नंदा की डोली वाण गांव में रात्रि विश्राम के बाद अपनी आगे की धार्मिक यात्रा और बुग्यालों की ओर प्रस्थान करेगी। इस अवसर पर यात्रा प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।