चमोली (उत्तराखंड): हिमालय की सुरम्य वादियों और विश्वप्रसिद्ध बेदनी बुग्याल स्थित पवित्र बेदनी कुंड में आज माँ नंदा राज राजेश्वरी की सप्तमी की लोक जात संपूर्ण विधि-विधान और पारंपरिक रीतियों के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बेदनी कुंड के तट पर पूजा-अर्चना कर जगज्जननी माँ नंदा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
पारंपरिक रीतियों से हुआ धार्मिक अनुष्ठान
सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही बेदनी कुंड परिसर ‘जय माँ नंदा’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा। स्थानीय पुरोहितों एवं वेदपाठियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता की विशेष पूजा, महाआरती और जात (यात्रा अनुष्ठान) का आयोजन किया गया। माँ नंदा देवी के पावन छंतोली (पवित्र छत्र) और निशानों के साथ पहुंचे ध्याणियों (मायके की बेटियों) और श्रद्धालुओं ने माता को पारंपरिक अर्घ्य अर्पित कर क्षेत्र की सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की।

आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित बेदनी कुंड, नंदा देवी लोक जात एवं प्रसिद्ध राजजात यात्रा का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण व पवित्र पड़ाव है। मखमली घास के विशाल मैदानों (बुग्याल) के मध्य स्थित इस कुंड के निर्मल जल में माँ नंदा की पूजा का विशेष धार्मिक महत्त्व है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों की कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे भक्तों के उत्साह के आगे मौसम की चुनौतियां भी फीकी नजर आईं।
भक्तिमय माहौल में मिला प्रसाद

विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान स्थानीय लोकगाथाओं (जागर) और नंदा देवी के मंगल गीतों की गूंज से संपूर्ण बुग्याल क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
माँ नंदा राज राजेश्वरी की कृपादृष्टि हम सब पर सदैव बनी रहे।