देहरादून। उत्तराखंड में वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को धरने के 143 दिन पूरे हो गए, जबकि मांगों के समर्थन में नर्सिंग अभ्यर्थियों का आमरण अनशन आज आठवें दिन भी जारी रहा। सरकार की कथित बेरुखी से प्रदेश भर के नर्सिंग बेरोजगारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।भीषण गर्मी में भी डटे अभ्यर्थीराजधानी देहरादून में पड़ रही चिलचिलाती गर्मी के बावजूद प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों अभ्यर्थी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत, फिर भी हौसले बुलंदआठ दिनों से अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे पांच नर्सिंगकर्मियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन उनका जज्बा कम नहीं हुआ है। अनशन पर बैठे मुख्य नाम निम्नलिखित हैं:शिरा बंधानीकविता पुंडीरमुकेश रमोलाबबलीहिमांशी आर्य”इतने दिनों से हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब तक वर्षवार भर्ती का शासनादेश जारी नहीं होता, संघर्ष थमेगा नहीं।” — आंदोलनकारी नर्सिंग अभ्यर्थीसमर्थन में उमड़ी भीड़आज के प्रदर्शन में भारी संख्या में युवा नर्सिंग पेशेवर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। धरना स्थल पर मुख्य रूप से नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, प्रवेश रावत, स्तुति, भास्कर, उपेंद्र, पपेंद्र और संदीप मटियाल सहित कई अन्य समर्थकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।क्या है प्रमुख मांग?नर्सिंग एकता मंच की स्पष्ट मांग है कि प्रदेश में नर्सिंग अधिकारियों के पदों पर वर्षवार मेरिट (Seniority-wise) के आधार पर भर्ती प्रक्रिया संपन्न की जाए। अभ्यर्थियों का तर्क है कि लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती न होने के कारण कई युवाओं की उम्र सीमा समाप्त हो रही है, ऐसे में वर्षवार चयन ही उनके साथ न्याय होगा।निष्कर्ष:143 दिनों का लंबा इंतजार और 8 दिनों का अनशन अब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और शासन इस गंभीर होते आंदोलन पर क्या रुख अपनाते हैं।बने रहें लेटेस्ट अपडेट्स के लिए।