श्रीनगर (गढ़वाल): राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग ने पहली बार अत्यंत जटिल स्पाइन सर्जरी और टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) को सफलतापूर्वक अंजाम देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस सफलता से अब स्थानीय स्तर पर ही बड़े ऑपरेशनों की राह आसान हो गई है।रीढ़ की हड्डी का सफल ऑपरेशन (Spine Surgery)हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. दया कृष्ण टम्टा और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुभाष चंद के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने रीढ़ की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे दो मरीजों का “पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन” तकनीक से सफल ऑपरेशन किया। चिकित्सकों की कुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्जरी के अगले ही दिन मरीजों को अपने पैरों पर खड़ा कर चलाया गया।जोखिम भरी हिप रिप्लेसमेंट सर्जरीअस्पताल ने एक ऐसे मरीज का भी सफल हिप रिप्लेसमेंट किया, जो न केवल एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) से ग्रस्त था, बल्कि गंभीर हृदय रोग (ट्रिपल वेसल डिजीज) से भी जूझ रहा था। मरीज का इजेक्शन फ्रैक्शन (हृदय की कार्यक्षमता) मात्र 25 प्रतिशत था, जिससे ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था।एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सतेंद्र यादव और उनकी टीम ने सूझबूझ से इस चुनौती को पार किया। इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. आशुतोष भारद्वाज, डॉ. शुभ्रांशु, डॉ. वैभव नौडियाल, डॉ. रवि श्रीवास्तव, डॉ. मिलिंद चौधरी और डॉ. सार्थक तोमर सहित नर्सिंग स्टाफ का विशेष योगदान रहा।”यह सफलता हमारे चिकित्सकों की मेहनत और आधुनिक तकनीक के समन्वय का परिणाम है। संस्थान भविष्य में भी पहाड़ के लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।” > — डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगरआयुष्मान योजना से मिली बड़ी राहतइन जटिल और महंगे ऑपरेशनों के लिए मरीजों को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। आयुष्मान भारत योजना के तहत ये सभी सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की गईं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को न केवल नया जीवन मिला है, बल्कि बड़े शहरों की ओर भागने की मजबूरी भी खत्म हुई है।भविष्य की राह: रिवर्स रेफरल की उम्मीदबेस अस्पताल में अब घुटना प्रत्यारोपण के बाद स्पाइन और हिप सर्जरी की सफलता ने एक नया द्वार खोल दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से श्रीनगर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, आने वाले समय में बड़े शहरों से मरीज इलाज के लिए श्रीनगर का रुख कर सकते हैं।