देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा और ईंधन संरक्षण की दिशा में कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘अल्पकालिक’ और ‘दीर्घकालिक’ सुधारों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है।
मुख्य बिंदु: क्या हुए बड़े बदलाव?
1. हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’:
ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के वाहन फ्लीट की संख्या आधी की जाएगी। सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ रहेगा, जिस दिन मंत्री और अधिकारी घर से ही (Work From Home) कार्य करेंगे। आम जनता को भी इसके लिए प्रेरित किया जाएगा।
2. 50% इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य:
नई ईवी पॉलिसी के तहत अब सरकारी विभागों में होने वाली नई गाड़ियों की खरीद में 50% इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदना अनिवार्य होगा। राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जाएगा।
3. ‘वर्क फ्रॉम होम’ और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग:
सरकारी विभागों में बैठकों के लिए यात्रा करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। निजी क्षेत्रों को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम हो सके।
4. एक अधिकारी, एक वाहन नीति:
जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग हैं, वे अब दिन भर में अधिकतम एक ही सरकारी वाहन का उपयोग कर सकेंगे। इसके साथ ही, सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन (बसों आदि) के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।
5. विदेशी यात्राओं और फिजूलखर्ची पर रोक:
कैबिनेट ने सरकारी विदेश यात्राओं को सीमित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर (AC) के सीमित उपयोग के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यटन और खान-पान में भी बदलाव की तैयारी
डोमेस्टिक टूरिज्म: ‘Visit My State’ अभियान के जरिए घरेलू पर्यटन और स्थानीय उत्पादों (Made in State) को बढ़ावा दिया जाएगा।
सेहत और बचत: आम जनता को कम तेल वाले भोजन के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्कूलों और अस्पतालों की कैंटीन में तेल की खपत की समीक्षा होगी।
प्राकृतिक खेती: खाद और उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों को ‘जीरो बजट फार्मिंग’ का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री का संदेश:
बैठक में सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप, छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों से हम ईंधन की बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव का सामना कर सकते हैं। यह कदम न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होंगे।