डिजिटल डेस्क, कोटद्वार (गढ़वाल): उत्तराखंड में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नकली दवा माफियाओं के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपना सबसे बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। एसटीएफ ने कोटद्वार में एक और अवैध नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री पर छापेमारी कर भारी मात्रा में बनी और अधबनी नकली दवाएं, रैपर्स, और पैकेजिंग सामग्रियां बरामद की हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि एसटीएफ की पिछले 24 घंटों में यह लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई है।प्रदेश में लगातार मिल रही इन फैक्ट्रियों के बाद स्वास्थ्य विभाग और दवा नियंत्रण विभाग में भी हड़कंप मच गया है।ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर चल रहा था खेलएसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, पकड़ी गई फैक्ट्री में देश की नामी और नामचीन फार्मास्युटिकल कंपनियों (Branded Pharmaceutical Companies) के रैपर और डिब्बे तैयार किए जा रहे थे। इन फैक्ट्रियों में बेहद सस्ती और घटिया सामग्री को जीवनरक्षक दवाओं (Life-saving drugs) की शक्ल देकर बाजार में महंगे दामों पर सप्लाई करने की योजना थी।एसटीएफ की इस बैक-टू-बैक रेड ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड में नकली दवाओं का नेटवर्क बेहद गहराई तक फैला हुआ है, जिसकी कड़ियां दूसरे राज्यों से भी जुड़ी हैं।कार्रवाई की मुख्य बातें (Key Highlights)लोकेशन: कोटद्वार और उसके आस-पास का औद्योगिक क्षेत्र।समयसीमा: महज 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी।बरामदगी: भारी मात्रा में नकली लाइफ-सेविंग ड्रग्स, प्रिंटेड रैपर्स, खाली शीशियां (Vials), क्यूआर कोड और दवा बनाने की मशीनें।नेक्सस: प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये नकली दवाएं केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के बाजारों में भी खपाने की तैयारी थी।कैसे हुआ इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश?एसटीएफ को खुफिया सूचना मिली थी कि कोटद्वार के कुछ बंद पड़े या वैध फैक्ट्रियों की आड़ में नकली दवाएं री-पैकेज और मैनुफैक्चर की जा रही हैं। एसटीएफ की टीम ने जब पहले ठिकाने पर दबिश दी, तो वहां से मिले सुरागों और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर महज कुछ ही घंटों के भीतर दूसरे ठिकाने को भी ढूंढ निकाला।एसएसपी एसटीएफ का बयान:”यह सीधे तौर पर जनता की सेहत से खिलवाड़ और बड़ा आपराधिक कृत्य है। हमारी टीम पूरे नेक्सस को खंगाल रही है। दवा कहां से बनकर आ रही थी, रैपर कहां छप रहे थे और इन्हें किन-किन मेडिकल स्टोर्स या सप्लायर्स को बेचा जाना था, इसकी पूरी चेन को ध्वस्त किया जाएगा। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”स्वास्थ्य व्यवस्था और जनता के लिए बड़ी चिंताउत्तराखंड का फार्मा हब (सिडकुल और अन्य औद्योगिक क्षेत्र) देश ही नहीं दुनिया भर में दवा सप्लाई के लिए जाना जाता है। लेकिन कुछ चंद माफियाओं की वजह से इस साख पर बट्टा लग रहा है। सूत्रों की मानें तो पकड़े गए गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं, जो इससे पहले भी पंजाब और राजस्थान में सक्रिय रहे हैं।एसटीएफ अब इस मामले में ड्रग्स कंट्रोलर और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है। आरोपियों के बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों की जांच भी शुरू कर दी गई है।