पोखरी (चमोली): चमोली जिले के पोखरी में शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बारिश के दौरान एक बड़ा हादसा होने से टल गया। पोखरी-मोहनखाल मार्ग पर पोखरी थाने के ठीक ऊपर सड़क किनारे खड़ी एक कार पर अचानक पहाड़ी से मलबा और विशालकाय पत्थर आ गिरे, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
गनीमत यह रही कि हादसा देर रात हुआ और उस वक्त कार में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। यदि यह घटना दिन के समय होती या वाहन में लोग सवार होते, तो गंभीर जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।
नगर में पार्किंग की किल्लत, खतरे के साए में गाड़ियां
इस घटना के बाद एक बार फिर पोखरी नगर में पार्किंग की गंभीर समस्या उजागर हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पोखरी में पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण वाहन चालकों को मजबूरी में अपनी गाड़ियां सड़कों के किनारे ही खड़ी करनी पड़ती हैं। बारिश के मौसम में ऐसे स्थानों पर भूस्खलन और ऊपर से चट्टानें गिरने का खतरा लगातार बना रहता है।
14 साल बाद भी नहीं बनी स्थायी पार्किंग:
स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए बताया कि नगर पंचायत पोखरी का गठन हुए करीब 14 वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक नगर में एक भी स्थायी पार्किंग का निर्माण नहीं हो सका है।
आखिर कहाँ अटका है पार्किंग का निर्माण?
मामले पर नगर पंचायत अध्यक्ष सोहनलाल ने बताया कि पोखरी-हापला मार्ग पर पोखरी से लगभग एक किलोमीटर दूर ‘पाव गेट’ के पास पार्क और पार्किंग स्थल के लिए भूमि चयनित की गई थी। नगर पंचायत ने वहां निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया था, लेकिन ग्राम विशाल के ग्रामीणों के विरोध और आपत्ति के कारण पिछले एक साल से काम पूरी तरह बंद पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में नगर के पास पार्किंग के लिए अन्य कोई उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है।
बुद्धिजीवियों ने उठाए सवाल: ठंडे बस्ते में मल्टी स्टोरी पार्किंग का प्रस्ताव
दूसरी ओर, स्थानीय बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों का कहना है कि समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है।
- लंबित प्रस्ताव: डामर टैक्सी स्टैंड पर काफी समय से ‘मल्टी स्टोरी पार्किंग’ बनाने का प्रस्ताव लंबित पड़ा है, जिस पर कोई प्रगति नहीं हुई।
- छोटी पार्किंग्स का अभाव: नगर की सड़कों के किनारे छोटे-छोटे पार्किंग स्पेस विकसित करने के लिए भी कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
प्रशासनिक हीलाहवाली के चलते आम जनता और वाहन चालक अपनी जान और माल जोखिम में डालकर सड़कों के किनारे वाहन पार्क करने को मजबूर हैं।