देहरादून: भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के देहरादून आगमन पर प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक विशेष स्वागत एवं अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीरथ सिंह रावत का अभिनंदन करते हुए उन्हें बधाई दी और साथ ही विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी पर तीखे प्रहार किए।

”तीरथ सिंह रावत को जिम्मेदारी मिलना उत्तराखंड के लिए सम्मान की बात”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि तीरथ सिंह रावत को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाना पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संगठन में इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से प्रदेश के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
CM धामी ने कहा, “तीरथ सिंह रावत सादगी, सौम्यता और सहजता की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम किया है। उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को मिलेगा।”
जातिगत विभाजन की राजनीति कर रही कांग्रेस: CM धामी
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शांत और सामाजिक समरसता वाले उत्तराखंड को जातियों के नाम पर बांटने का प्रयास कर रही है। CM धामी ने कहा कि कांग्रेस के पास विकास और जनहित के मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह समाज में विभाजन पैदा करने की राजनीति में जुटी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की जनता जागरूक है और वह कांग्रेस के इन राजनीतिक मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देगी।
हल्द्वानी प्रकरण पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल
हल्द्वानी में हाल ही में घटी घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले नारे लगाए गए और अत्यंत घृणित कृत्य किया गया, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस स्थान का नियम अनुसार शुद्धिकरण किया गया, लेकिन दुखद है कि राहुल गांधी को इस संवेदनशील विषय में भी राजनीति दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक भावनाओं के अपमान जैसे गंभीर मामले पर कांग्रेस स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज कराने के बजाय इसे राजनीतिक चश्मे से क्यों देख रही है।