देहरादून | 04 अप्रैल, 2026
उत्तराखंड में सियासी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर ‘दायित्वों का पिटारा’ खोल दिया है। राज्य सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए भाजपा के 14 कद्दावर नेताओं को विभिन्न परिषदों, समितियों और आयोगों में जिम्मेदारी सौंपी है। खास बात यह है कि इन सभी को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है।
क्षेत्रीय संतुलन पर जोर: गढ़वाल से 8 और कुमाऊं से 6 नेता
सरकार ने इस सूची में भौगोलिक संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की है। नियुक्त किए गए 14 नेताओं में से 8 गढ़वाल मंडल से हैं, जबकि 6 नेता कुमाऊं मंडल के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद इस कदम को रूठे हुए कार्यकर्ताओं को मनाने और चुनावी जमीन मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
किसे क्या मिली जिम्मेदारी? (प्रमुख नियुक्तियां)
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, प्रमुख नेताओं को निम्नलिखित पदों पर तैनात किया गया है:
नेता का नाम पद/परिषद जिलाखेम सिंह चौहान उपाध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद नैनीतालध्रुव रौतेला उपाध्यक्ष, मीडिया सलाहकार समिति चंपावतमुकेश महराना उपाध्यक्ष, चाय विकास सलाहकार परिषद चमोलीप्रेम सिंह राणा उपाध्यक्ष, जनजाति आयोग अल्मोड़ागोविंद सिंह पिलखुवा उपाध्यक्ष, हथकरघा हस्तशिल्प विकास परिषद उधम सिंह नगरसीमा चौहान उपाध्यक्ष, मत्स्य विकास प्राधिकरण देहरादूनबलजीत सोनी उपाध्यक्ष, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग -चारु कोठारी उपाध्यक्ष, राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद –
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?कार्यकर्ताओं में उत्साह: चुनाव से करीब एक साल पहले कार्यकर्ताओं को सरकार में भागीदारी देकर बीजेपी ने कैडर को सक्रिय करने की कोशिश की है।जातीय समीकरण: पिछड़ा वर्ग, जनजाति और अल्पसंख्यक आयोगों में नियुक्तियों के जरिए सरकार ने सोशल इंजीनियरिंग का संदेश दिया है।बगावत पर लगाम: हाल ही में कुछ बड़े नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद, यह कदम पार्टी के भीतर असंतोष को रोकने के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ माना जा रहा है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि इन नियुक्तियों से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।ऐसी ही और खबरों के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।