ऊखीमठ | विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल-विग्रह उत्सव डोली ने आज अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से धाम के लिए प्रस्थान किया। वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शुरू हुई इस यात्रा के साथ ही केदारनाथ यात्रा का औपचारिक शंखनाद हो गया है।भक्ति और उल्लास का संगमडोली के प्रस्थान के समय ऊखीमठ में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊं) की थाप और ‘जय बाबा केदार’ के उद्घोष से पूरी केदार घाटी गुंजायमान हो उठी। स्थानीय निवासियों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बाबा की डोली को विदा किया।यात्रा का कार्यक्रम: मुख्य पड़ावबाबा की डोली तीन दिनों की पैदल यात्रा के बाद केदारनाथ धाम पहुंचेगी। यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:प्रथम पड़ाव (आज): डोली रात्रि विश्राम के लिए फाटा पहुंचेगी।द्वितीय पड़ाव (कल): फाटा से प्रस्थान कर बाबा की डोली गौरीकुंड में रुकेगी।धाम आगमन: गौरीकुंड से प्रस्थान कर डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी।विशेष तिथि: धार्मिक परंपराओं के अनुसार, 22 अप्रैल को ब्रह्ममुहूर्त में विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।प्रशासनिक तैयारियां पूरीकेदारनाथ यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) अलर्ट मोड पर है। पैदल मार्ग से बर्फ हटाने, पेयजल, बिजली और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गई हैं। मंदिर समिति के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।