सनसनीखेज: नाबालिग को बंधक बनाकर रची गई ‘फर्जी पोक्सो’ की साजिश, चम्पावत पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचाचम्पावत। जनपद में एक नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर उसका झूठा वीडियो वायरल करने और निर्दोषों को पोक्सो एक्ट (POCSO Act) में फंसाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। चम्पावत पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।क्या है पूरा मामला?दिनांक 08 मई 2026 को ग्राम सल्ली निवासी श्री राम सिंह रावत ने कोतवाली चम्पावत में तहरीर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि 06 मई को कमल सिंह रावत नाम के व्यक्ति ने उनके घर का ताला तोड़कर एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के पैर रस्सी से बांध दिए और उसे कमरे में बंधक बना लिया।यही नहीं, आरोपी ने षड्यंत्र के तहत नाबालिग का एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो का मकसद वादी के पुत्र और दो अन्य व्यक्तियों को झूठे पोक्सो केस में फंसाना था।पुलिस की जांच और बड़ी कार्रवाईपुलिस अधीक्षक श्रीमती रेखा यादव के निर्देशन में मामले की निष्पक्ष जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस ने मामले में धारा 16/17 पोक्सो एक्ट की बढ़ोतरी की और दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया:कमल सिंह रावत: (पुत्र बची सिंह रावत, निवासी ग्राम सल्ली, चम्पावत) – मुख्य साजिशकर्ता।कुमारी अर्जिता राय: (पुत्री स्व० ललित मोहन राय, निवासी लोहाघाट/कनलगांव) – सह-आरोपी।आरोपी कमल सिंह का पुराना आपराधिक रिकॉर्डपुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी कमल सिंह रावत एक आदतन अपराधी है। उसके विरुद्ध पूर्व में भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं:2026: आईटी एक्ट और पोक्सो अधिनियम के तहत मामला।2017: मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के दो अलग-अलग मामले।2023: छेड़छाड़, अपहरण और बलात्कार (धारा 354/363/376/506 भादवि)।2024: आईटी एक्ट (66C) के तहत धोखाधड़ी का मामला।चम्पावत पुलिस की चेतावनीपुलिस ने स्पष्ट किया है कि अन्य फरार आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी होगी। चम्पावत पुलिस ने जनता से अपील की है:”महिला एवं बाल अपराधों के प्रति हमारी नीति Zero Tolerance की है। जो कोई भी कानून का दुरुपयोग करेगा या झूठे आरोपों में किसी को फंसाने की साजिश रचेगा, उसके विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”सावधान: पोक्सो एक्ट के तहत किसी भी पीड़ित या नाबालिग की पहचान उजागर करना या उससे संबंधित भ्रामक जानकारी साझा करना दंडनीय अपराध है।